ट्रम्प ने चीन पर 10% टैरिफ कम किया, जिनपिंग ने अमेरिकी सोयाबीन खरीदने पर जताई सहमति; 100 मिनट चली बातचीत से व्यापार युद्ध में आई नरमी

वाशिंगटन/बीजिंग।
अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापार तनाव में बड़ी राहत की खबर आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच लगभग 100 मिनट लंबी वार्ता के बाद अमेरिका ने चीन पर लगाए गए 10% टैरिफ में कमी का ऐलान किया है। बदले में चीन ने अमेरिकी सोयाबीन की खरीद दोबारा शुरू करने पर सहमति जताई है।

यह बातचीत दक्षिण कोरिया के बुसान में हुई, जहां दोनों नेताओं ने व्यापार विवाद, कृषि उत्पादों के आयात-निर्यात और दुर्लभ धातुओं (Rare Earth Metals) के नियंत्रण जैसे मुद्दों पर चर्चा की।


📍 क्या हुआ समझौते में

अमेरिका ने इस साल चीन पर लगाए गए कुल 100% अतिरिक्त टैरिफ की समीक्षा करने का वादा किया है। पहले चरण में 10% की कटौती की जाएगी। इसके जवाब में चीन ने अमेरिकी सोयाबीन की निरंतर खरीद बहाल करने की सहमति दी है।

यह कदम अमेरिकी किसानों के लिए राहतभरा माना जा रहा है, क्योंकि चीन अमेरिकी सोयाबीन का सबसे बड़ा आयातक रहा है। बीते दो सालों से व्यापार युद्ध के कारण चीन ने अपने आयात में भारी कटौती की थी, जिससे अमेरिकी कृषि क्षेत्र पर दबाव बढ़ गया था।


🇺🇸 अमेरिका का पक्ष

व्हाइट हाउस के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि यह समझौता “एक सकारात्मक शुरुआत” है, लेकिन अभी सभी मुद्दों पर पूर्ण सहमति नहीं बनी है।
उन्होंने कहा, “हम चीन के साथ संतुलित व्यापार चाहते हैं। यह टैरिफ कटौती किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के हित में है।”


🇨🇳 चीन की प्रतिक्रिया

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी इस समझौते को “रचनात्मक” बताया और कहा कि दोनों देशों को “आपसी सम्मान और समान लाभ के सिद्धांत” पर आगे बढ़ना चाहिए।
बीजिंग की ओर से बयान में कहा गया कि चीन अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद बढ़ाने के लिए तैयार है, लेकिन अमेरिका को तकनीकी निर्यात प्रतिबंधों में भी राहत देनी होगी।


🌎 वैश्विक बाजार पर असर

वार्ता के बाद एशियाई और यूरोपीय शेयर बाजारों में तेजी देखी गई। अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ और सोयाबीन के फ्यूचर प्राइस में 3% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
विश्लेषकों का कहना है कि यह समझौता व्यापार युद्ध की दिशा बदल सकता है, हालांकि यह अस्थायी राहत है, स्थायी समाधान नहीं।


🔍 विशेषज्ञों की राय

अंतरराष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को कम कर सकता है।
आर्थिक विश्लेषक डेविड बेंसन ने कहा, “10% टैरिफ कटौती एक संकेत है कि अमेरिका और चीन टकराव नहीं, सहयोग की दिशा में बढ़ना चाहते हैं।”
हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि “तकनीकी, सुरक्षा और निवेश प्रतिबंध जैसे बड़े मुद्दे अभी भी टेबल पर हैं।”


📌 आगे क्या

दोनों देशों के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि आने वाले महीनों में अगला राउंड वार्ता आयोजित किया जाएगा, जिसमें टैरिफ कटौती, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और रेयर अर्थ मेटल्स पर सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा जारी रहेगी।


निष्कर्ष:
अमेरिका-चीन के बीच यह नया व्यापारिक समझौता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए राहतभरी खबर है। भले ही यह पूर्ण समाधान न हो, लेकिन इससे संकेत मिला है कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अब संवाद और समझौते के रास्ते पर लौट रही हैं।

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