तूफ़ान ‘मोन्था’ ओडिशा पहुंचा: समुद्र में उठीं ऊंची लहरें, हवा की रफ्तार 100 किमी प्रति घंटा तक पहुँची

आंध्र में 5.30 घंटे चला लैंडफॉल, कई इलाक़ों में तेज़ बारिश और बिजली गुल

भुवनेश्वर / विशाखापट्टनम:
चक्रवाती तूफ़ान ‘मोन्था’ (Cyclone Montha) ने बुधवार सुबह ओडिशा के तटीय इलाक़ों को अपनी चपेट में ले लिया। समुद्र में ऊंची लहरें उठ रही हैं और कई तटीय जिलों में तेज़ हवाओं और भारी बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग के अनुसार, हवा की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई है।

इससे पहले मंगलवार देर रात ‘मोन्था’ ने आंध्र प्रदेश के काकीनाड़ा तट पर लैंडफॉल किया था, जो करीब 5 घंटे 30 मिनट तक चला। इस दौरान समुद्र में ऊंची लहरें और तेज़ हवाएं चलती रहीं। लैंडफॉल की प्रक्रिया पूरी होने के बाद तूफ़ान का केंद्र धीरे-धीरे ओडिशा की ओर बढ़ गया।


ओडिशा में बढ़ा खतरा

ओडिशा के गजपति, गंजाम, पुरी, केंद्रापाड़ा और जगतसिंहपुर जिलों में तेज़ बारिश हो रही है।
पुरी और भुवनेश्वर में बुधवार सुबह से ही आंधी के साथ झमाझम बारिश हो रही है। तटीय इलाक़ों में समुद्र की लहरें सामान्य से 8-10 फीट ऊंची उठ रही हैं।

ओडिशा सरकार ने NDRF, ODRAF और फायर सर्विस की 45 से ज़्यादा टीमें तैनात की हैं। प्रशासन ने समुद्र किनारे और निचले इलाक़ों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया है। मछुआरों को अगले दो दिनों तक समुद्र में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है।

राज्य के विशेष राहत आयुक्त ने बताया कि स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और सभी ज़िलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।


आंध्र प्रदेश में तबाही के निशान

आंध्र प्रदेश में मोन्था के लैंडफॉल के दौरान तेज़ हवाओं और भारी बारिश से कई जगह बिजली और संचार सेवाएँ बाधित हुईं।
पूर्वी गोदावरी, कृष्णा और विशाखापट्टनम जिलों में कई पेड़ और बिजली के खंभे गिर गए।
अभी तक किसी बड़े नुकसान या जनहानि की सूचना नहीं है, लेकिन प्रशासन ने रेस्क्यू और राहत टीमों को सतर्क रखा है।


मौसम विभाग की चेतावनी

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने बताया कि तूफ़ान अब धीरे-धीरे उत्तर-पूर्व दिशा की ओर बढ़ रहा है और अगले 12 घंटे में इसका प्रभाव पश्चिम बंगाल के तटीय इलाक़ों में महसूस किया जा सकता है।

ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटीय ज़िलों में भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना जताई गई है।
IMD ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।


मोन्था कैसे बना तूफ़ान

‘मोन्था’ का उद्गम बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव क्षेत्र से हुआ था।
यह सिस्टम धीरे-धीरे गंभीर चक्रवाती तूफ़ान में तब्दील हो गया।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, खाड़ी के ऊपर उच्च तापमान और पर्याप्त नमी ने इस तूफ़ान को ताक़तवर बना दिया।


एनडीआरएफ की तैयारी

एनडीआरएफ के महानिदेशक अतुल करवाल ने बताया कि तूफ़ान प्रभावित इलाक़ों में खाद्य सामग्री, पानी, दवाइयाँ और बिजली बैकअप की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने कहा —

“हमारी टीमें चौबीसों घंटे सक्रिय हैं। प्राथमिक लक्ष्य है — किसी भी स्थिति में जनहानि न हो।”


नागरिकों से अपील

ओडिशा पुलिस और जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे समुद्र किनारे न जाएं, अफवाहों पर ध्यान न दें और बिजली के पोल या पेड़ों के पास खड़े न हों।
राज्य सरकार ने सभी स्कूलों को अगले दो दिनों के लिए बंद रखने का आदेश दिया है।

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