नई दिल्ली | बंगाल की खाड़ी के पश्चिम-मध्य हिस्से में बना चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ अब भीषण चक्रवाती तूफान का रूप ले चुका है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, यह मछलीपट्टनम से करीब 190 किमी दक्षिण-पूर्व, काकीनाडा से 270 किमी दक्षिण-पूर्व, और विशाखापट्टनम से 340 किमी दक्षिण-दक्षिणपूर्व में केंद्रित है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्थिति की समीक्षा करते हुए आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू से बात की है और अधिकारियों को पूरी सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने तटीय इलाकों में राहत दलों को सतर्क मोड पर रहने को कहा है।
कैसे पड़ा इस तूफान का नाम ‘मोंथा’?
दरअसल, ‘मोंथा’ नाम थाईलैंड की ओर से सुझाया गया है।
उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र में आने वाले चक्रवातों के नाम 13 सदस्य देशों की पहले से तय सूची से लिए जाते हैं।
इनमें शामिल हैं —
भारत, बांग्लादेश, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका, थाईलैंड, ईरान, क़तर, सऊदी अरब, यूएई और यमन।
यह नामकरण प्रणाली ईएससीएपी (ESCAP) और विश्व मौसम संगठन (WMO) ने साल 2000 में शुरू की थी।
मोंथा के बाद आने वाले नाम होंगे — बुरेवी (मालदीव), तौकते (म्यांमार), यास (ओमान) और गुलाब (पाकिस्तान)।
क्यों ज़रूरी है तूफानों का नाम रखना?
चक्रवातों को नाम देने का मकसद है —
लोगों, प्रशासन और मीडिया के लिए उन्हें आसानी से पहचानना और याद रखना।
अगर एक ही समय पर दो चक्रवात बनें, तो भ्रम की स्थिति न हो।
साथ ही, चेतावनी और राहत संदेशों को बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुंचाना आसान होता है।
उत्तर हिंद महासागर के चक्रवातों का नामकरण भारतीय मौसम विभाग, नई दिल्ली में स्थित विशेष केंद्र द्वारा किया जाता है।
थोड़ा इतिहास भी जानिए…
साल 2000 में मस्कत में हुए ESCAP-WMO सम्मेलन में तय हुआ कि चक्रवातों को नाम दिया जाएगा।
2004 से यह प्रक्रिया लागू हुई।
बाद में 2018 के सम्मेलन में ईरान, क़तर, सऊदी अरब, यूएई और यमन को भी जोड़ा गया।
भारत की ओर से इस समन्वय की ज़िम्मेदारी डॉ. मृत्युंजय मोहापात्रा को दी गई थी, जिनकी रिपोर्ट के आधार पर अप्रैल 2020 में नई सूची को मंज़ूरी मिली।
